Posts

Showing posts from April, 2025

बातों की बुनाई, जादू सा असर

  बातों की बुनाई , जादू सा असर कहते हैं की बोलना तो हम जल्द सीख ही जाते हैं । पर कब कहाँ क्या बोलना हैं ये सीखने मैं पूरी उम्र निकल जाती हैं । बोलने का असली हुनर तो तब हैं जब कोई दिल से बात करे । बात करना बस लफ़्ज़ों को एक के बाद एक जोड़ने का नाम नहीं है , बल्कि ये तो एक फ़न है , एक कला है , जिसमें न सिर्फ़ कहा जाता है , बल्कि महसूस भी करवाया जाता है। बातों से ही दोस्त बनते हैं तो बातों से दुश्मन भी बन जाते हैं इसलिए हमें बोलते वक़्त अपने शब्दों पर ध्यान देते हुए बोलना चाहिए जो किसी को ठेस न पहुचाएं । आपने भी नोटिस किया होगा — कुछ लोग ऐसे होते हैं जो बस दो मिनट की बात में ही अपना असर छोड़ जाते हैं। उनकी बातों में ऐसा अपनापन होता है कि लगता है जैसे बरसों से जानते हैं। वहीं कुछ लोग घंटे भर बोलते रहते हैं पर एक बात भी दिल को नहीं छूती। क्यों ? क्योंकि बातचीत में सिर्फ़ बोलना काफ़ी नहीं होता , उसमें जज़्बात , टाइमिंग , और सामने वाले की फ़ीलिंग्स की कद्र करना भी बेहद ज़रूरी है। ...